अक्सर उपभोक्ता सोचता है कि मंडी भाव सिर्फ किसान और व्यापारी का मामला है। लेकिन हकीकत यह है कि मंडी का हर बदलाव थाली तक पहुंचता है।
मंडी से रसोई तक का सफर
- मंडी भाव बढ़ा → थोक भाव बढ़ा
- थोक भाव बढ़ा → खुदरा महंगा
- उपभोक्ता खर्च बढ़ा
उपभोक्ता क्या समझ सकता है?
- सीजनल खरीद करें
- अचानक महंगे उत्पादों से बचें
- स्थानीय बाजार को समझें
👉 HTR जानकारी सिर्फ ट्रेडर्स नहीं, उपभोक्ताओं के लिए भी है।
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