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2026 के खाड़ी युद्ध (ईरान संघर्ष) का भारत की कृषि अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

 रिपोर्ट: कृषि वस्तु कीमतें, व्यापार करने वाले किसान, व्यापारी एवं उपभोक्ता

मार्च 2026 में अमेरिका-इज़राइल के ईरान पर हमलों के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ बंद होने से वैश्विक शिपिंग 75-90% प्रभावित हुई है। तेल की कीमतें 50% से अधिक बढ़ गई हैं, उर्वरक (यूरिया) की आपूर्ति बाधित हुई है और भारत के खाड़ी देशों को $11.8 बिलियन कृषि निर्यात जोखिम में है। भारत, जो खाड़ी से 40% तेल और बड़ी मात्रा में उर्वरक आयात करता है, पर इसका गहरा असर पड़ रहा है। अल्पावधि में कुछ निर्यात-उन्मुख फसलों की घरेलू कीमतें घटी हैं, लेकिन मध्यमावधि में उर्वरक-डीजल महंगाई से खरीफ फसल और खाद्य महंगाई बढ़ने की आशंका है।

प्रभाव सारणी

श्रेणीप्रभावमुख्य विवरण
कृषि वस्तु कीमतेंअल्पावधि: गिरावट; मध्यमावधि: वृद्धिबासमती चावल कीमतें 5-6% घटीं, प्याज ₹14-15 से ₹9-10/किलो तक गिरा (निर्यात रुकने से घरेलू ग्लूट)। यूरिया कीमतें 30-40% बढ़ीं (ग्लोबल $480 से $650-720/टन)। तेल-डीजल महंगा होने से परिवहन व सिंचाई लागत बढ़ी। खरीफ सीजन में फसल उत्पादन कम होने से चावल, दाल, सब्जी कीमतें बढ़ सकती हैं।
व्यापार करने वाले किसानआय में कमी + लागत बढ़ोतरीपंजाब, हरियाणा, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश के किसानों को $4.4 बिलियन बासमती चावल निर्यात नुकसान। उर्वरक-डीजल महंगा (30%+), खरीफ बुआई प्रभावित। आय घटने से किसान संकट, फसल बीमा की मांग बढ़ी।
व्यापारी (एक्सपोर्टर/ट्रेडर)उच्च जोखिम, घाटा व अवसरफ्रेट व बीमा लागत 25-30% बढ़ी, शिपमेंट देरी। बासमती, मसाले, केला, मीट निर्यात बाधित। कई व्यापारी अनुबंध रद्द या नये बाजार (चीन, यूरोप) तलाश रहे हैं। अस्थिरता से मुनाफा घटा, काला बाजारी का खतरा।
उपभोक्ताबढ़ती खाद्य महंगाईLPG, परिवहन महंगा → दूध, ब्रेड, सब्जी, चावल कीमतें प्रभावित। अल्पावधि में प्याज-टमाटर सस्ते, लेकिन लंबे समय में उर्वरक संकट से फसल कम होने पर व्यापक महंगाई (35-40 bps प्रति $10 तेल बढ़ोतरी)। गरीब परिवार सबसे अधिक प्रभावित।

निष्कर्ष एवं सुझाव

यह युद्ध भारत की कृषि को दोहरी मार दे रहा है — निर्यात घाटा और उत्पादन लागत वृद्धि। GTRI और FAO की रिपोर्टों के अनुसार, यदि संघर्ष लंबा चला तो वैश्विक खाद्य सुरक्षा संकट गहरा सकता है। सरकार को उर्वरक सब्सिडी बढ़ानी चाहिए, वैकल्पिक आपूर्ति (चीन, रूस) तेज करनी चाहिए और किसानों को फसल विविधीकरण व बीमा प्रदान करना चाहिए। व्यापारियों को बाजार विविधीकरण अपनाना होगा, जबकि उपभोक्ताओं को महंगाई से बचाव के लिए सरकार की निगरानी जरूरी है।

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